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Patient started walking on the second day of surgery. Call Dr. Chirag for all kind of Spine Problems
'दैनिक भास्कर' और 'स्पाइन एंड जॉइंट सेण्टर' के संयुक्त तत्वावधान में रीढ़ की हड्डी व जोड़ों में दर्…
'दैनिक भास्कर' और 'स्पाइन एंड जॉइंट सेण्टर' के संयुक्त तत्वावधान में रीढ़ की हड्डी व जोड़ों में दर्द के मरीजों के लिए एक शिविर का आयोजन किया जा रहा है जिसमे रीढ़ की हड्डी व जोड़ों से सम्बंधित अभी समस्याओं का उपचार किया जाएगा। इस शिविर में रजिस्ट्रेशन शुल्क मात्र 50 रूपए रखा गया है। साथ ही बीएमडीसी की जाँच नि:शुल्क रहेगी और अन्य जाँचों पर 30% की छूट रहेगी। अतः अधिक से अधिक संख्या में पहुँचकर इस शिविर का लाभ उठाएँ। रजिस्ट्रेशन के लिए कॉल करें: 9818885335, 7690061978 #MedicalCamp #OrthopaedicCamp #Arthritis #Osteoporosis #Treatment #SpineandJointCenter #Alwar
न्यूनतम इनवेसिव स्पाइन सर्जरी - Minimally Invasive Spine Surgery (MISS)
मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी (एमआईएसएस) का प्रयोग स्पाइन से सम्बंधित रोगों जैसे कमर में दर्द, नसों में खिचाव तथा स्लिप डिस्क के उपचार में किया जाता है. एमआईएसएस के फायदे: ✦ इसमें जोखिम व जटिलता कम होती है ✦ छोटे चीरे लगने से कम खून बहता है ✦ रोगी अगले ही दिन उठ सकता है और चल सकता है ✦ सर्जरी के बाद का दर्द भी काम होता है ✦ दैनिक गतिविधियों और काम पर तुरंत लौटा जा सकता है अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे: डॉ. चिराग जायसवाल, स्पाइन एंड जॉइंट सेण्टर, अलवर: 9414352047, 9818885335
घुटने की सर्जरी (Knee Surgery):
घुटने में हुई व्याधि में किसी कारणवश जब दवाईयों से आराम न मिले तब डॉक्टर सर्जरी की सलाह देते है. आइए जानते है उन परिस्थितयों के बारे में जिनमे घुटने की सर्जरी कराई जाती है: - घुटने में मेनिसकस (Meniscus) फट जाने पर आर्थोस्कोपी की जाती है - मेनिसकस रिपेयर या मेनिसकस ट्रांसप्लांट के दौरान - Plica Syndrome होने पर - खेलते समय लिगामेंट्स (Ligaments) फट जाने पर - माइक्रो फ्रैक्चर होने पर - आंशिक या पूर्ण Knee Replacement के दौरान घुटने और जोड़ संबंधी सभी समस्याओं के निदान हेतु संपर्क करें: डॉ. चिराग जायसवाल, स्पाइन एंड जॉइंट सेण्टर, अलवर: 9818885335 #KneeSurgery #Meniscus #Ligaments #KneeReplacement #SpineandJointCentre #Alwar
स्लिप डिस्क एंड सिएटिका कारण एवं लक्षण
हमारी कमर रीड की हड्डी,डिस्क और नस की बनी होती है. डिस्क दो हड्डियों के बीच में एक शॉक absorber का काम करती है लेकिन उम्र बढ़ने पर डिस्क का पानी सूखता है एवं भारी वजन उठाने पर, चोट लगने पर स्लिप डिस्क हो सकती है. जब ये स्लिप डिस्क सिएटिक नस (जोकि कमर से होकर पैरों को जाती है) पर दबाव डालती है इससे पीठ से पैर तक दर्द होना, पैरों में सुन्नपन, करंट लगना एवं पैरों में कमजोरी एवं लवक आना आदि होते है और ये दर्द छींकने, खांसने एवं आगे झुकने से बढता है अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे स्पाइन एंड जॉइंट सेण्टर, अलवर 9818885335
आजकल बहुत सारे लोगो को स्लिप डिस्क एंड सिएटिका की शिकायत होती हैं. इस बीमारी से बचने के निम्न तरी…
आजकल बहुत सारे लोगो को स्लिप डिस्क एंड सिएटिका की शिकायत होती हैं. इस बीमारी से बचने के निम्न तरीके हैं: 1. सही पोजीशन में बैठकर काम करना 2. लगातार लम्बे समय तक ना बैठना 3. भारी सामान उठाने से बचना 4. कड़े बिस्तर पर सोना 5. गर्म स्नान करना 6. नियमित घूमना एवं व्यायाम करना 7. कैल्सियम युक्त पदार्थो का सेवन करना अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे स्पाइन एंड जॉइंट सेण्टर, अलवर 9818885335